३२ आगम के नाम
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उत्तर
जैन परंपरा में प्रचलित ३२ आगम के नाम इस प्रकार बताए जाते हैं:
१. ११ अंग आगम
- आचारांग सूत्र
- सूत्रकृतांग सूत्र
- स्थानांग सूत्र
- समवायांग सूत्र
- व्याख्याप्रज्ञप्ति / भगवती सूत्र
- ज्ञाताधर्मकथा
- उपासकदशांग
- अंतकृद्दशांग
- अनुत्तरौपपातिकदशांग
- प्रश्नव्याकरण
- विपाकश्रुत
२. १२ उपांग आगम
- औपपातिक सूत्र
- राजप्रश्नीय सूत्र
- जीवाभिगम सूत्र
- प्रज्ञापना सूत्र
- सूर्यप्रज्ञप्ति
- जम्बूद्वीपप्रज्ञप्ति
- चन्द्रप्रज्ञप्ति
- निरयावलिका
- कल्पावतंसिका
- पुष्पिका
- पुष्पचूलिका
- वृष्णिदशा
३. ६ छेदसूत्र
- निशीथ सूत्र
- महानिशीथ सूत्र
- व्यवहार सूत्र
- दशाश्रुतस्कंध
- बृहत्कल्प सूत्र
- जीतकल्प सूत्र
४. ३ मूलसूत्र
- दशवैकालिक सूत्र
- उत्तराध्ययन सूत्र
- आवश्यक सूत्र
संक्षिप्त समझ
इस प्रकार कुल संख्या होती है:
- ११ अंग
- १२ उपांग
- ६ छेदसूत्र
- ३ मूलसूत्र
कुल = ३२ आगम
ध्यान देने योग्य बात
श्वेतांबर जैन परंपरा में आगमों की गणना अलग-अलग संदर्भों में ३२, ४५ या अन्य वर्गीकरणों के रूप में भी मिलती है। यहाँ आपने जो ३२ आगम पूछे हैं, उनके अनुसार नाम दिए गए हैं।