Chakravarti racha Gaya samvasaen
आपका प्रश्न "Chakravarti racha Gaya samvasaen" जैन धर्म से संबंधित है। "चक्रवर्ती" का अर्थ है ऐसा सम्राट जिसने पृथ्वी के सभी छह खंडों पर राज्य किया हो। जैन धर्म में कुल 12 चक्रवर्ती माने गए हैं, जो हर तीर्थंकर के काल में होते हैं।
"रचा गया संवास" या "संवस" शब्द का अर्थ है—समय काल या अवधि। जैन आगमों के अनुसार, प्रत्येक चक्रवर्ती का शासन काल अलग-अलग होता है, और वे अपने-अपने काल में धर्म, दया, एवं न्याय की स्थापना करते हैं।
जैन परंपरा के अनुसार, चक्रवर्ती निम्नलिखित हैं (उदाहरण स्वरूप):
- भरत चक्रवर्ती (श्री ऋषभदेव के पुत्र)
- सागर चक्रवर्ती
- संप्रति चक्रवर्ती
- शाल्य चक्रवर्ती
- शांति चक्रवर्ती
- कुंतल चक्रवर्ती
- महापद्म चक्रवर्ती
- हरिशेण चक्रवर्ती
- जयसेन चक्रवर्ती
- ब्रह्मदत्त चक्रवर्ती
- श्रेणिक चक्रवर्ती
- कर्ण चक्रवर्ती
यह सभी अपने-अपने काल में जैन धर्म के आदर्शों का पालन करते थे और अहिंसा, सत्य, और दया का प्रचार करते थे।
यदि आप किसी विशेष चक्रवर्ती या उनके काल (संवस) के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, तो कृपया स्पष्ट करें।