. वह कौन थी जिन्होंने अपने पति को सन्मा प्र.2. मोक्ष का मार्ग कौनसा है ? और संसार का मार्ग कौनसा है ?
उत्तर
प्र. 2. मोक्ष का मार्ग कौन-सा है?
जैन धर्म के अनुसार सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान और सम्यक्चरित्र — ये तीनों मिलकर मोक्ष मार्ग हैं। इन्हें रत्नत्रय कहा जाता है।
संसार का मार्ग कौन-सा है?
मिथ्यादर्शन, मिथ्याज्ञान और मिथ्याचारित्र — ये संसार में भटकाने वाले कारण हैं। मोह, राग-द्वेष, हिंसा, असत्य, लोभ आदि संसार के मार्ग को बढ़ाते हैं।
व्याख्या
मोक्ष का मार्ग आत्मा को कर्मों से मुक्त करने वाला मार्ग है:
- सम्यग्दर्शन — आत्मा, कर्म, पुण्य-पाप, मोक्ष आदि तत्त्वों में सही श्रद्धा।
- सम्यग्ज्ञान — तत्त्वों का सही ज्ञान।
- सम्यक्चरित्र — राग-द्वेष छोड़कर संयम और अहिंसा का आचरण।
इसके विपरीत, जब जीव मिथ्या श्रद्धा, गलत ज्ञान और असंयमित आचरण में रहता है, तब वह संसार में जन्म-मरण के चक्र में भटकता रहता है।
आध्यात्मिक समझ
जैन धर्म हमें सिखाता है कि बाहरी सुख स्थायी नहीं हैं। सच्चा सुख आत्मा की शुद्ध अवस्था में है। इसलिए सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान और सम्यक्चरित्र को अपनाना ही आत्मकल्याण का मार्ग है।
निष्कर्ष
मोक्ष मार्ग: सम्यग्दर्शन + सम्यग्ज्ञान + सम्यक्चरित्र।
संसार मार्ग: मिथ्यादर्शन + मिथ्याज्ञान + मिथ्याचारित्र।