=0 Bel श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर क्रमांक 3 मधुबन कॉलोनी, टॉक फाटक, जयपुर दिनांक 21.9.20 दशलक्षण पर्व समारोह (15 सितम्बर, से 25 सितम्बर, 2026) धार्मिक जैन प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता नाम: चीपुष शाह पिता/पति का नाम प्रभोर जी शाह नियम :- 1. फ
Answer
आपने धार्मिक जैन प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का भरा हुआ फॉर्म साझा किया है। इसमें कुछ उत्तर सही हैं, लेकिन कुछ उत्तरों में सुधार की आवश्यकता दिखती है। नीचे प्रश्नों के अनुसार सम्भावित शुद्ध उत्तर दिए जा रहे हैं।
सुधारित उत्तर
प्र.1. वह कौन थी जिन्होंने अपने पति को सन्मार्ग पर लगाया?
उत्तर: रानी चेलना
प्र.2. मोक्ष का मार्ग कौनसा है? और संसार का मार्ग कौनसा है?
उत्तर: सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान और सम्यक्चरित्र मोक्षमार्ग हैं।
मिथ्यादर्शन, मिथ्याज्ञान और मिथ्याचारित्र संसारमार्ग हैं।
प्र.3. जैन धर्म में तीन रत्न किसको कहा गया है?
उत्तर: सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान और सम्यक्चरित्र
प्र.4. ज्ञानावरण कर्म के क्षय से क्या प्रकट होता है?
उत्तर: अनंत ज्ञान प्रकट होता है।
प्र.5. किस धर्म का लक्षण है?
दिया गया भाव: मन को रोककर स्वाध्याय करना।
उत्तर: यह उत्तम संयम धर्म से संबंधित है।
प्र.6. भारत में बाहुबली भगवान का निर्वाण कहाँ से हुआ?
उत्तर: कैलाश पर्वत से।
प्र.7. नवधा भक्ति कितने प्रकार की होती है? पूरा लिखिए।
उत्तर: नवधा भक्ति 9 प्रकार की होती है। सामान्यतः दिगम्बर परंपरा में आहारदान के प्रसंग में नवधा भक्ति इस प्रकार कही जाती है:
- पड़गाहन
- उच्च स्थान देना
- पाद प्रक्षालन
- पूजन
- नमस्कार
- मन शुद्धि
- वचन शुद्धि
- काय शुद्धि
- आहार शुद्धि
प्र.8. हनुमान जी कहाँ से मोक्ष गए?
उत्तर: जैन परंपरा के अनुसार मांगी-तुंगी सिद्धक्षेत्र से।
प्र.9. श्रीपाल को जिसने बचाया और समुद्र में जिसने गिरवाया, नाम बताओ।
उत्तर: समुद्र में गिराने वाला धवल सेठ था। बचाने वाले के नाम में आपके लिखे उत्तर में अस्पष्टता है। यदि यह प्रश्न स्थानीय पाठ/कथा पर आधारित है, तो प्रतियोगिता की पुस्तक या आयोजकों द्वारा निर्धारित पाठ के अनुसार ही उत्तर मान्य होगा।
प्र.10. “एक तीर के लागत कृष्ण की विनाश गई काया” यह लाइन कहाँ से ली गई है और तीर किसने चलाया?
उत्तर: यह पंक्ति बारह भावना से संबंधित मानी जाती है। तीर जरा नामक शिकारी ने चलाया।
Takeaway
मुख्य सुधार यह है कि मोक्षमार्ग हमेशा सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान और सम्यक्चरित्र है, और संसारमार्ग मिथ्यादर्शन, मिथ्याज्ञान और मिथ्याचारित्र से जुड़ा है। यही जैन धर्म के तीन रत्नों की मूल शिक्षा है।