वह कौन थे जिन्होंने अपने मुँह से सांप के मुंह का कांटा निकाला था
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उत्तर
जैन परंपरा में यह प्रसंग भगवान महावीर स्वामी से जुड़ा हुआ माना जाता है।
उन्होंने करुणा और अहिंसा की भावना से एक सांप के मुँह में फँसा कांटा अपने मुँह से निकालकर उसकी पीड़ा दूर की थी।
आध्यात्मिक समझ
यह प्रसंग जैन धर्म की मूल भावना को दर्शाता है:
- अहिंसा — किसी भी जीव को कष्ट न देना
- करुणा — सभी जीवों के दुख को अपना समझना
- जीव दया — छोटे-बड़े हर जीव के प्रति दया रखना
सार
भगवान महावीर का जीवन हमें सिखाता है कि सच्चा धर्म हर जीव के प्रति करुणा और अहिंसा में है।