Paryushan k kaunse din kya-kya hai?
पaryushan, जैन धर्म का सबसे महत्वपूर्ण पर्व है, जो श्वेताम्बर परंपरा में 8 दिन (अष्टानिका) और दिगंबर परंपरा में 10 दिन (दश लक्ष्णा) तक मनाया जाता है। यहां श्वेताम्बर परंपरा के अनुसार 8 दिनों का विवरण दिया गया है:
1. पहला दिन – आत्म शुद्धि का दिन: पaryushan की शुरुआत आत्म-शुद्धि, तप, और संयम के संकल्प के साथ होती है। लोग व्रत, उपवास और प्रार्थना करते हैं।
2. दूसरा दिन – क्षमा और विनय का दिन: इस दिन क्षमा (माफी) और विनय (विनम्रता) का भाव रखा जाता है। लोग एक-दूसरे से क्षमा याचना करते हैं।
3. तीसरा दिन – आराधना का दिन: तीसरे दिन लोग विशेष रूप से धर्म आराधना, स्वाध्याय, और प्रवचन सुनते हैं।
4. चौथा दिन – ध्यान और संयम का दिन: ध्यान, साधना, और इंद्रिय संयम पर विशेष बल दिया जाता है।
5. पाँचवां दिन – तपस्या का दिन: लोग कठिन तप, उपवास, और आत्मनिरीक्षण करते हैं।
6. छठा दिन – साधना का दिन: साधना, स्वाध्याय, और धर्म चर्चा को आगे बढ़ाया जाता है।
7. सातवां दिन – उपसंहार और आत्म-विश्लेषण का दिन: लोग पूरे सप्ताह के व्यवहार का आत्म-विश्लेषण करते हैं और शुद्धि का संकल्प दोहराते हैं।
8. आठवां दिन – संवत्सरी (Samvatsari): यह सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। इस दिन सभी लोग 'क्षमावाणी' (forgiveness) करते हैं, यानी सभी से क्षमा माँगते हैं – "Micchami Dukkadam" (मिच्छामी दुक्कड़म्) बोलते हैं। यह आत्म-शुद्धि और अहिंसा का चरम दिन है।
दिगंबर परंपरा (दसलक्षणा पर्व): दिगंबर परम्परा में पaryushan के बाद 10 दिनों का दसलक्षणा पर्व मनाया जाता है, जिसमें हर दिन एक-एक धर्म (उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन्य, ब्रह्मचर्य) की साधना की जाती है।
नोट: हर दिन का विशेष महत्त्व है, लेकिन संपूर्ण पaryushan का उद्देश्य आत्म-शुद्धि, संयम, तप, क्षमा, और अहिंसा की साधना करना है।