भगवान महावीर की दिव्यध्वनि कितने दिन बाद खीरी जैन धर्म के अनुसार
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उत्तर
जैन धर्म के अनुसार भगवान महावीर स्वामी को केवलज्ञान प्राप्त होने के बाद उनकी दिव्यध्वनि 66 दिन बाद खिरी।
व्याख्या
भगवान महावीर को वैशाख शुक्ल दशमी के दिन केवलज्ञान प्राप्त हुआ। परंतु उस समय योग्य गणधर उपस्थित नहीं थे, इसलिए दिव्यध्वनि प्रकट नहीं हुई।
बाद में इन्द्रभूति गौतम आदि विद्वान ब्राह्मण भगवान महावीर के समवसरण में आए। इन्द्रभूति गौतम भगवान महावीर के प्रथम गणधर बने। तब भगवान की दिव्यध्वनि खिरी और जिनवाणी का प्रवर्तन हुआ।
आध्यात्मिक समझ
जैन परंपरा में दिव्यध्वनि का प्रकट होना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि उसी के माध्यम से तीर्थंकर भगवान का उपदेश संसार के जीवों तक पहुँचता है।
सार
भगवान महावीर की दिव्यध्वनि केवलज्ञान के 66 दिन बाद खिरी।