मुझे कम से 24 तीर्थंकरों के गर्भ और मोक्ष कल्याण की तिथि बताओ
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Answer
नीचे 24 तीर्थंकरों के गर्भ कल्याणक और मोक्ष कल्याणक की पारंपरिक तिथियाँ दी गई हैं। अलग-अलग जैन परंपराओं और पंचांग-परंपराओं में कुछ तिथियों में भेद मिल सकता है।
| क्रम | तीर्थंकर | गर्भ कल्याणक तिथि | मोक्ष कल्याणक तिथि |
|---|---|---|---|
| 1 | श्री ऋषभदेव / आदिनाथ भगवान | आषाढ़ कृष्ण 2 | माघ कृष्ण 14 |
| 2 | श्री अजितनाथ भगवान | ज्येष्ठ शुक्ल 13 | चैत्र शुक्ल 5 |
| 3 | श्री संभवनाथ भगवान | फाल्गुन शुक्ल 8 | चैत्र शुक्ल 5 |
| 4 | श्री अभिनंदननाथ भगवान | वैशाख शुक्ल 6 | वैशाख शुक्ल 8 |
| 5 | श्री सुमतिनाथ भगवान | श्रावण शुक्ल 2 | चैत्र शुक्ल 9 |
| 6 | श्री पद्मप्रभ भगवान | चैत्र कृष्ण 5 | मार्गशीर्ष कृष्ण 11 |
| 7 | श्री सुपार्श्वनाथ भगवान | भाद्रपद शुक्ल 6 | फाल्गुन कृष्ण 7 |
| 8 | श्री चंद्रप्रभ भगवान | फाल्गुन कृष्ण 5 | भाद्रपद कृष्ण 7 |
| 9 | श्री पुष्पदंत / सुविधिनाथ भगवान | फाल्गुन कृष्ण 9 | भाद्रपद शुक्ल 8 |
| 10 | श्री शीतलनाथ भगवान | आषाढ़ कृष्ण 6 | आषाढ़ कृष्ण 2 |
| 11 | श्री श्रेयांसनाथ भगवान | फाल्गुन कृष्ण 6 | श्रावण कृष्ण 3 |
| 12 | श्री वासुपूज्य भगवान | फाल्गुन कृष्ण 14 | भाद्रपद शुक्ल 14 |
| 13 | श्री विमलनाथ भगवान | आषाढ़ कृष्ण 10 | आषाढ़ शुक्ल 7 |
| 14 | श्री अनंतनाथ भगवान | चैत्र कृष्ण 7 | चैत्र शुक्ल 5 |
| 15 | श्री धर्मनाथ भगवान | वैशाख शुक्ल 7 | ज्येष्ठ शुक्ल 4 |
| 16 | श्री शांतिनाथ भगवान | भाद्रपद कृष्ण 7 | ज्येष्ठ कृष्ण 13 |
| 17 | श्री कुंथुनाथ भगवान | श्रावण कृष्ण 9 | वैशाख शुक्ल 1 |
| 18 | श्री अरनाथ भगवान | मार्गशीर्ष शुक्ल 10 | मार्गशीर्ष शुक्ल 10 |
| 19 | श्री मल्लिनाथ भगवान | फाल्गुन शुक्ल 4 | चैत्र शुक्ल 4 |
| 20 | श्री मुनिसुव्रतनाथ भगवान | श्रावण कृष्ण 15 / अमावस्या | ज्येष्ठ कृष्ण 9 |
| 21 | श्री नमिनाथ भगवान | आषाढ़ कृष्ण 10 | वैशाख कृष्ण 10 |
| 22 | श्री नेमिनाथ भगवान | कार्तिक शुक्ल 12 | आषाढ़ शुक्ल 8 |
| 23 | श्री पार्श्वनाथ भगवान | चैत्र कृष्ण 4 | श्रावण शुक्ल 7 |
| 24 | श्री महावीर स्वामी भगवान | आषाढ़ शुक्ल 6 | कार्तिक कृष्ण 15 / अमावस्या |
Takeaway
गर्भ कल्याणक वह पावन अवसर है जब तीर्थंकर भगवान का जीव माता के गर्भ में आता है, और मोक्ष कल्याणक वह परम पावन क्षण है जब वे सभी कर्मों से मुक्त होकर सिद्ध पद को प्राप्त करते हैं। इन तिथियों का स्मरण श्रद्धा, भक्ति और आत्मकल्याण की भावना को जाग्रत करता है।