kshayopsham samyak darshan ki paribhash
Answer
Kshayopsham Samyak Darshan वह सम्यग्दर्शन है जो दर्शन-मोहनीय कर्म के आंशिक क्षय और आंशिक उपशम से उत्पन्न होता है।
सरल शब्दों में:
जिस सम्यक श्रद्धा में मिथ्यात्व का कुछ भाग नष्ट हो जाता है और कुछ भाग दब जाता है, उसे क्षायोपशमिक सम्यग्दर्शन कहते हैं।
Explanation
क्षायोपशम दो शब्दों से बना है:
- क्षय — कर्म का पूर्ण नाश
- उपशम — कर्म का अस्थायी रूप से शांत या दब जाना
जब जीव के भीतर दर्शन-मोहनीय कर्म का कुछ अंश नष्ट हो जाता है और कुछ अंश शांत हो जाता है, तब जीव को तत्त्वों में सही श्रद्धा उत्पन्न होती है। यह श्रद्धा स्थायी पूर्ण शुद्ध अवस्था नहीं होती, क्योंकि कुछ मोहनीय कर्म केवल दबा हुआ होता है, नष्ट नहीं।
Spiritual Understanding
क्षायोपशमिक सम्यग्दर्शन जीव को मिथ्यात्व से हटाकर सच्चे धर्ममार्ग की ओर ले जाता है। इसमें जीव को आत्मा, कर्म, पुण्य-पाप, आस्रव, संवर, निर्जरा और मोक्ष आदि तत्त्वों में यथार्थ श्रद्धा होने लगती है।
यह अवस्था अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि सम्यग्दर्शन के बिना मोक्षमार्ग की वास्तविक शुरुआत नहीं मानी जाती।
Takeaway
क्षायोपशम सम्यग्दर्शन वह सम्यक श्रद्धा है जो दर्शन-मोहनीय कर्म के आंशिक नाश और आंशिक शमन से प्रकट होती है।