Dev gati me konse swarg tak devi rahti hai
जैन धर्म के अनुसार, देव गति (स्वर्ग) में कुल चार प्रकार के स्वर्ग होते हैं—कल्पवासी (कल्पिक), कल्पातीत (अकल्पिक), व्यंतर, और ज्योतिषी। प्रमुख रूप से, जो बात पूछी गई है—देवगति के स्वर्गों में देवी कहाँ तक रहती हैं?
उत्तर: जैन आगमों के अनुसार, स्त्रियाँ (देवी) केवल चौथे कल्पवासी स्वर्ग (सौधर्म, ईशान, संनत, महेन्द्र) तक ही उत्पन्न हो सकती हैं। चौथे स्वर्ग तक देवियाँ होती हैं, परन्तु उसके ऊपर के स्वर्गों (पाँचवाँ महाशुक्र आदि तथा अकल्पिक स्वर्ग) में देवी उत्पन्न नहीं होतीं, वहाँ केवल देव (पुरुष रूप) ही होते हैं।
सारांश: देवियाँ केवल चौथे कल्पवासी स्वर्ग (महेन्द्र स्वर्ग) तक ही उत्पन्न होती हैं, उससे ऊपर के स्वर्गों में नहीं।