rote rote kisko kevalgyan hua
Jainism ke anusar, "rote rote" (बहुत रोने के कारण) केवलज्ञान प्राप्त करने का प्रसंग भगवान महavira ke sambandh mein aata hai.
एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, महावीर स्वामी के केवलज्ञान प्राप्ति के कुछ समय पहले, जब वे घोर तपस्या कर रहे थे, तब उन्हें बहुत कष्ट झेलना पड़ा। एक बार चंडकौशिक नामक नाग ने उन्हें डस लिया, जिससे उनके शरीर से खून निकलने लगा और उन्हें बहुत पीड़ा हुई। कुछ कथाओं में वर्णित है कि इस पीड़ा के कारण उनके नेत्रों से आंसू निकल आए, लेकिन उन्होंने मानसिक रूप से पूर्ण संयम और समता बनाए रखी।
लेकिन, "रोते-रोते केवलज्ञान" प्राप्त करने का विशेष उल्लेख श्री अर्हंत भगवान या अन्य तीर्थंकरों की कथाओं में स्पष्ट रूप से नहीं मिलता। सामान्यतः केवलज्ञान प्राप्ति के लिए तपस्या, ध्यान और आत्म-शुद्धि का उल्लेख किया गया है, न कि रोने या दुखी होने से।
यदि आप किसी विशेष कथा या प्रसंग की बात कर रहे हैं, कृपया और स्पष्ट करें, ताकि मैं आपको सही जानकारी दे सकूं।
संक्षेप में, Jainism ke pramukh shastro ke anusar, केवलज्ञान तपस्या, ध्यान, और आत्म-शुद्धि के परिणामस्वरूप प्राप्त होता है, न कि रोने के कारण।