prabhu bhakti karte karte tirthkar namkaran kisne kiya
जैन धर्म के अनुसार, तीर्थंकरों का नामकरण उनके जन्म के समय विशेष शुभ लक्षणों, स्वप्नों एवं ज्योतिषीय संकेतों के आधार पर माता-पिता या राजपरिवार के ज्योतिषी द्वारा किया जाता है। तीर्थंकर के जन्म के समय उनकी माता को 14 (या श्वेतांबर परंपरा में 16) शुभ स्वप्न आते हैं, जिनका अर्थ राजज्योतिषी या पंडित बताते हैं, और फिर उनके अनुसार नामकरण किया जाता है।
उदाहरण के लिए, भगवान महावीर का नामकरण उनके माता-पिता राजा सिद्धार्थ और रानी त्रिशला ने ज्योतिषियों की सलाह पर 'वर्धमान' रखा था, क्योंकि उनके जन्म के बाद राज्य में समृद्धि (वर्धना) आई थी। बाद में उनके वीरतापूर्ण तप और संयम के कारण उन्हें 'महावीर' की उपाधि दी गई।
इस प्रकार, तीर्थंकरों का नामकरण मुख्यतः उनके माता-पिता, ज्योतिषी और समाज द्वारा किया जाता है, जो उनके जन्म के समय के शुभ लक्षणों, स्वप्नों एवं घटनाओं के आधार पर निर्धारित होता है।