हर केवली अरिहंत हैं ?
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उत्तर
हाँ, हर केवली अरिहंत होते हैं — यदि वे शरीर सहित संसार में विद्यमान हैं और उन्होंने चार घातिया कर्मों का क्षय कर दिया है।
स्पष्टीकरण
जैन धर्म में केवली वह आत्मा है जिसे केवलज्ञान प्राप्त हो गया है। केवलज्ञान प्राप्त होते ही आत्मा के चार घातिया कर्म नष्ट हो जाते हैं:
- ज्ञानावरणीय कर्म
- दर्शनावरणीय कर्म
- मोहनीय कर्म
- अंतराय कर्म
इन कर्मों के नष्ट होने से आत्मा अरिहंत कहलाती है, क्योंकि उसने आंतरिक शत्रुओं — राग, द्वेष, मोह आदि — पर विजय प्राप्त कर ली होती है।
महत्वपूर्ण भेद
- अरिहंत: केवलज्ञानी आत्मा जो शरीर सहित लोक में विद्यमान है।
- सिद्ध: वही आत्मा जब आयु पूर्ण होने पर शरीर छोड़कर मोक्ष में पहुँच जाती है।
इसलिए शरीर सहित केवलज्ञानी को अरिहंत कहा जाता है, और शरीर छोड़ने के बाद वही आत्मा सिद्ध कहलाती है।
Takeaway
हर केवली अरिहंत है जब तक वह शरीर में विद्यमान है; मोक्ष प्राप्त होने के बाद वही सिद्ध कहलाता है।