Parshwnath bhagwan ko patra
पार्श्वनाथ भगवान जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर हैं। उन्हें समर्पित पत्र (पत्रिका) लिखते समय श्रद्धा, भक्ति और विनम्रता का भाव होना चाहिए। यहाँ एक उदाहरण प्रस्तुत है:
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पार्श्वनाथ भगवान को पत्र
हे भगवन श्री पार्श्वनाथ,
सादर वंदन!
मैं आपके चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम करता/करती हूँ। आपके उपदेशों और अहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य तथा अपरिग्रह के मार्ग पर चलने का सतत प्रयास करता/करती हूँ। आपकी करुणा और उपदेशों ने संसार के जीवों को मोक्ष मार्ग की ओर प्रेरित किया है।
हे प्रभु! मुझे भी आपके बताए मार्ग पर चलने की शक्ति और विवेक प्रदान करें। मेरी आत्मा की शुद्धि हो, और मैं सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान और सम्यक् चरित्र को अपनाते हुए आध्यात्मिक उन्नति कर सकूँ। आपके चरणों में मेरी प्रार्थना है कि मुझे क्रोध, अभिमान, माया और लोभ से बचाकर रखिए।
आपकी असीम कृपा बनी रहे और मैं अहिंसा, क्षमा, दया और संयम के मार्ग पर अग्रसर रहूँ—यही मेरी विनती है।
आपका शरणागत, [आपका नाम]
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आप अपने भाव और आवश्यकता अनुसार इसमें परिवर्तन कर सकते हैं।