Samay kyon karni chahie
समय (Samayik) जैन धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण साधना अभ्यास है। समयिक का अर्थ है "समता भाव में रहना", अर्थात् राग-द्वेष, क्रोध, मान, माया, लोभ आदि से रहित होकर आत्मा में स्थिर रहना। जैन धर्म में समय करने के कई कारण हैं:
- आत्मिक शुद्धि: समय करने से आत्मा की शुद्धि होती है और पापों का क्षय होता है।
- समता का अभ्यास: यह अभ्यास राग-द्वेष से मुक्त होकर समता की स्थिति में रहने का अभ्यास कराता है।
- कर्म निर्जरा: समय करने से पुराने पाप कर्मों का क्षय होता है और नए पाप कर्मों का बंधन रुकता है।
- आध्यात्मिक उन्नति: नियमित समय करने से साधक की आत्मा उन्नत होती है और मोक्ष के मार्ग में प्रगति होती है।
- अहिंसा का पालन: समय में रहकर मन, वचन और काय से किसी भी जीव को क्षति नहीं पहुँचाई जाती, जिससे अहिंसा का पूर्ण पालन होता है।
- ध्यान और संयम: समय करने से ध्यान और संयम की आदत विकसित होती है, जिससे मानसिक शांति मिलती है।
इसलिए, जैन धर्म में समयिक को बहुत महत्व दिया गया है और प्रत्येक श्रावक-श्राविका को प्रतिदिन कम-से-कम एक बार समयिक करने की प्रेरणा दी जाती है।