Rishab dev ke pita konsi jati ke dev bane
भगवान ऋषभदेव के पिता का नाम राजा नाभिराज था। जैन परंपरा के अनुसार, राजा नाभिराज इक्ष्वाकु वंश के थे और वे एक महान चक्रवर्ती सम्राट माने जाते हैं। जैन शास्त्रों के अनुसार, राजा नाभिराज एवं उनकी रानी मरुदेवी के पुत्र ऋषभदेव प्रथम तीर्थंकर बने।
जहाँ तक देवत्व की बात है, जैन मान्यता के अनुसार, पुण्य कर्मों के फलस्वरूप आत्माएँ स्वर्ग (देव लोक) में जन्म ले सकती हैं। कई शास्त्रों में उल्लेख है कि ऋषभदेव के पिता नाभिराज ने चक्रवर्ती जीवन के पश्चात मोक्ष की प्राप्ति की थी या उत्तम गति में जन्म लिया था; परंतु वे किस विशेष देव लोक में गए, इस बारे में स्पष्ट विवरण जैन आगमों में नहीं मिलता है।
अतः, संक्षेप में—राजा नाभिराज इक्ष्वाकु वंश के थे और ऋषभदेव के पिता के रूप में प्रसिद्ध हैं।