Kabal sambhal dev markar kya bane
आपका प्रश्न "कबाल संभाल देव मरकर क्या बने" है।
जैन धर्म के अनुसार, जब कोई देव (देव लोग, यानी स्वर्ग के जीव) अपनी आयु पूरी कर लेते हैं और मर जाते हैं, तो उनका अगला जन्म उनके कर्मों के अनुसार निर्धारित होता है। देव मरने के बाद सीधे मोक्ष नहीं पा सकते, क्योंकि देवों के लिए मोक्ष संभव नहीं है। देव योनि में जन्म, पुण्य कर्मों के फलस्वरूप मिलता है, लेकिन वहाँ भी मोह, अहंकार आदि बाधाएँ रहती हैं।
देव मरने के बाद वे चार गतियों (मनुष्य, तिर्यंच, नारक, या फिर से देव) में कहीं भी जन्म ले सकते हैं, यह उनके शेष कर्मों पर निर्भर करता है। अगर पुण्य कर्म अधिक हैं और मोक्षमार्ग पर प्रवृत्ति है, तो वे मनुष्य योनि में जन्म लेकर मोक्ष प्राप्त कर सकते हैं। अगर अशुभ कर्म अधिक हैं, तो तिर्यंच (पशु-पक्षी आदि) या नरक में भी जा सकते हैं।
संक्षेप में: देव मरकर उनके कर्मों के अनुसार मनुष्य, तिर्यंच, नरक या फिर से देव बन सकते हैं, लेकिन सीधे मोक्ष नहीं पा सकते।
यह जैन आगमों और तत्त्वज्ञान के अनुसार उत्तर है।