Goh bhrahman balak pramad ka hatyara bhi sidh gati ka adhikar ban gaya vaha kon tha
आपका प्रश्न "गोह, ब्राह्मण, बालक, प्रमाद का हत्यारा भी सिद्धगति का अधिकारी बन गया, वह कौन था?"—यह जैन साहित्य में वर्णित एक प्रसिद्ध प्रसंग से संबंधित है।
इस कथा के अनुसार, यह वर्णन Marudevi Mata (भगवान ऋषभदेव की माता) के संबंध में नहीं है, बल्कि Anathi Muni (अनाथी मुनि) या कभी-कभी Shalibhadra की कथाओं में इस प्रकार की घटनाओं का उल्लेख मिलता है, परंतु सबसे प्रसिद्ध प्रसंग है Jambu Swami के शिष्य Prabhav (प्रभाव) की कथा।
लेकिन आपके द्वारा पूछे गए चार दोष—गोह (गोह की हत्या), ब्राह्मण (ब्राह्मण की हत्या), बालक (बालक की हत्या), प्रमाद (अत्यंत प्रमादी)—ये सब दोष जिनके जीवन में थे और फिर भी वे 'सिद्धगति' (मोक्ष) के अधिकारी बने, वह प्रसंग Prabhav (प्रभाव) कुमार की कथा से संबंधित है।
प्रभाव कुमार ने पूर्व जन्म में अज्ञानवश गोह, ब्राह्मण, और बालक की हत्या की थी और जीवन में प्रमाद किया, लेकिन पश्चाताप के बाद जैन धर्म के अनुशासनों को अंगीकार किया, दीक्षा लेकर तपस्या की और अंततः मोक्ष (सिद्धगति) के अधिकारी बने। यह कथा इस बात का प्रमाण है कि कितने भी बड़े पापी व्यक्ति ने यदि सच्चे हृदय से पश्चाताप करके जैन धर्म के मार्ग का अनुसरण किया, तो वह भी मोक्ष का अधिकारी बन सकता है।
सारांश: प्रभाव कुमार (Prabhav Kumar) वह पात्र हैं, जिन्होंने गोह, ब्राह्मण, बालक की हत्या की थी और प्रमादी जीवन जिया, फिर भी पश्चाताप और जैन धर्म पालन के कारण सिद्धगति (मोक्ष) को प्राप्त किया।
यदि आपको विस्तार से कथा चाहिए, तो कृपया बताएं।