Athaay kitne prakar ki hoti hai
जैन धर्म के अनुसार "अथाय" (अथाया) का अर्थ है—अन्न का अपव्यय या अन्न का नाश करना। जैन आगमों में अथाय को पाप माना गया है।
जैन साहित्य के अनुसार, अथाय तीन प्रकार की होती है:
- आगम अथाय – वह अन्न जो किसी के द्वारा जानबूझकर नष्ट किया जाता है।
- व्यवहार अथाय – वह अन्न जो किसी की असावधानी या लापरवाही से नष्ट हो जाता है।
- पर्याय अथाय – वह अन्न जो प्राकृतिक कारणों, जैसे कीट, हवा, वर्षा आदि से नष्ट हो जाता है।
जैन धर्म में अन्न का आदर करना और उसका अपव्यय न करना अहिंसा का पालन करने का एक महत्त्वपूर्ण अंग माना गया है।