Tikhutto Sutra in hindi
तीखुट्टो सूत्र (Tikhutto Sutra) जैन आगमों में एक महत्वपूर्ण सूत्र है, जो विशेष रूप से तीन रत्नों (सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान, सम्यकचारित्र) के महत्व को दर्शाता है। यह सूत्र अंग-बाह्य आगम "श्री तत्त्वार्थसूत्र" के साथ-साथ अन्य प्राचीन ग्रंथों में भी उल्लेखित है।
तीखुट्टो सूत्र का हिंदी अनुवाद व भावार्थ इस प्रकार है:
तीखुट्टो धम्मो, तीखुट्टा सुद्धि, तीखुट्टेणं चरे धम्मं, सो हवइ सुद्धो।
हिंदी अर्थ: धर्म तीन रत्नों (सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान और सम्यकचारित्र) से युक्त है। तीनों के द्वारा ही शुद्धि (मोक्ष) की प्राप्ति होती है। इन तीनों के सहारे ही धर्म का आचरण करना चाहिए; वही शुद्ध (मोक्षगामी) बनता है।
भावार्थ: जैन धर्म के अनुसार सम्यग्दर्शन (सच्ची श्रद्धा), सम्यग्ज्ञान (सही ज्ञान) और सम्यकचारित्र (सही आचरण) — ये तीनों ही मोक्ष मार्ग के आधार स्तंभ हैं। इन तीनों के बिना सच्चा धर्म नहीं माना जाता। इसलिए प्रत्येक साधक को इन तीनों की प्राप्ति और रक्षा करनी चाहिए।
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