मनुष्य लोग के बाहर सूर्य और चंद्रमा कौन से नक्षत्र पर स्थित होते हैं
जैनधर्म के अनुसार, ब्रह्माण्ड (लोक) की संरचना बहुत ही विशेष और वैज्ञानिक रूप से वर्णित है। जैनागमों में सूर्य और चंद्रमा की स्थिति का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। जैन भूगोल के अनुसार, सूर्य और चंद्रमा "त्रयंस" नामक लोक के मध्य भाग में स्थित होते हैं।
जैन ग्रंथों के अनुसार, सूर्य और चंद्रमा कोई नक्षत्र (जैसे रोहिणी, मृगशिरा आदि) पर स्थित नहीं होते, बल्कि ये स्वतंत्र ज्योतिषीय पिंड हैं। वे अपने-अपने मार्ग पर चलते हैं, और पृथ्वी के चारों ओर नहीं, बल्कि मध्यलोक के चारों ओर परिक्रमा करते हैं। जैन सिद्धांत के अनुसार, इनके मार्गों का वर्णन 'सूर्य-चंद्र-प्रज्ञप्ति' सूत्र आदि शास्त्रों में मिलता है।
इसलिए, जैन धर्म के अनुसार, सूर्य और चंद्रमा किसी विशेष नक्षत्र पर स्थित नहीं हैं, बल्कि वे अपने-अपने नियत मार्ग पर चलते हैं और उनकी गति भी अन्य ग्रहों और नक्षत्रों से स्वतंत्र है।