ओलक्षशाला किसे कहते हैं
ओलक्षशाला (ओलक्षक शाला) जैन धर्म में उस स्थान या कक्ष को कहते हैं जहाँ साधु-साध्वियाँ अपने विहार के दौरान, विशेषत: रात्रि के समय, विराम या ठहराव करते हैं। यह शाला मन्दिर, उपाश्रय या अन्य किसी शांत, शुद्ध एवं सुरक्षित स्थान में हो सकती है। ओलक्षशाला में साधु-साध्वियाँ ध्यान, स्वाध्याय, आराधना, और विश्राम करते हैं।
जैन आगमों में ओलक्षशाला का उल्लेख उन नियमों और मर्यादाओं के साथ मिलता है, जिनका साधु-साध्वियों को ठहराव के दौरान पालन करना चाहिए, ताकि अहिंसा, संयम और शुद्धता की भावना बनी रहे।
संक्षेप में, ओलक्षशाला वह स्थान है जहाँ जैन साधु-साध्वियाँ ठहरते हैं और अपने आध्यात्मिक कर्तव्यों का पालन करते हैं।