Sukshm jeev kya hote hai hai
जैन धर्म के अनुसार, "सूक्ष्म जीव" (Sukshma Jeev) वे जीव होते हैं, जो अत्यंत सूक्ष्म, अदृश्य और एकेन्द्रिय होते हैं। ये जीव सामान्यत: हमारी आँखों से दिखाई नहीं देते। इन्हें 'निगोदिया' या 'निगोद जीव' भी कहा जाता है। सूक्ष्म जीवों में पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और वनस्पति के एकेन्द्रिय जीव शामिल होते हैं। इन जीवों का जीवन स्तर बहुत ही साधारण होता है और इनमें केवल स्पर्शेन्द्रिय (touch sense) ही पाया जाता है।
जैन दर्शन में अहिंसा के सिद्धांत के कारण, सूक्ष्म जीवों की भी रक्षा और उनका सम्मान करने का उपदेश दिया गया है। उदाहरण के लिए, पानी छानकर पीना, रात में अनावश्यक रूप से चलना-फिरना ना करना, जमीन पर अनावश्यक जल या मिट्टी न फैलाना आदि—ये सब सूक्ष्म जीवों की रक्षा हेतु किए जाते हैं।
संक्षेप में, सूक्ष्म जीव वे अत्यंत छोटे, अदृश्य, एकेंद्रिय प्राणी हैं जिन्हें भी जैन धर्म में अहिंसा के अंतर्गत महत्व दिया गया है।