देवियां किस स्वर्ग तक उत्पन्न होती हैं
जैन धर्म के अनुसार, देवियाँ (स्त्रीदेव) केवल प्रथम (सौधर्म) और द्वितीय (इशान) स्वर्ग तक ही उत्पन्न होती हैं। तृतीय (सनाथ), चतुर्थ (महेंद्र) और उससे ऊपर के स्वर्गों में देवियों का जन्म नहीं होता। इससे ऊपर केवल पुरुष देव ही उत्पन्न होते हैं।
यह व्यवस्था जैन आगमों एवं ग्रंथों में स्पष्ट रूप से वर्णित है।