देवियां किस स्वर्ग तक उत्पन्न होती हैं ऐसा किस ग्रन्थ में लिखा है
जैन आगमों के अनुसार, देवियों (स्त्री-देवगण) की उत्पत्ति केवल सौधर्म (प्रथम स्वर्ग) और ईशान (द्वितीय स्वर्ग) तक ही होती है। इसके आगे के स्वर्गों में स्त्री-देवियाँ उत्पन्न नहीं होतीं। यह विषय जैन आगम ग्रंथों में, विशेषकर ततिया श्रुतस्कंध (तृतीय श्रुतस्कंध) और समवायांग सूत्र में वर्णित है। इसके अलावा, यह विवरण तत्त्वार्थ सूत्र (Acharya Umaswati द्वारा रचित) के सप्तम अध्याय में भी मिलता है:
तत्त्वार्थ सूत्र (7.10): "स्त्र्यः सौधर्म-ईशानयोः।" अर्थात्, "स्त्रियाँ केवल सौधर्म और ईशान स्वर्ग में उत्पन्न होती हैं।"
इस प्रकार, जैन शास्त्रों के अनुसार देवियाँ केवल प्रथम एवं द्वितीय स्वर्ग (सौधर्म और ईशान) तक ही जन्म लेती हैं।