parshwanth bhagwan ke pichle janam
भगवान पार्श्वनाथ जी के पिछले (पूर्व) जन्मों के बारे में जैन ग्रंथों में विस्तार से वर्णन मिलता है। पार्श्वनाथ जी जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर हैं। उनके पूर्वजन्मों की कथाओं का उल्लेख मुख्यतः जैन पुराणों, जैसे 'कल्याणक कथा' और 'तीर्थंकर चरित्र' आदि में मिलता है।
पार्श्वनाथ जी के पिछले जन्म के बारे में प्रसिद्ध कथा के अनुसार:
उनका अंतिम पूर्वजन्म "मरुभूति" नामक एक ब्राह्मण के रूप में हुआ था। मरुभूति अपने बड़े भाई कमठ के साथ रहते थे। एक दिन कमठ ने अग्निहोत्र यज्ञ में लकड़ी जला दी, जिसमें दो नाग (सर्प) दंपत्ति (धरणेंद्र और पद्मावती) जल गए। मरुभूति ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन कमठ ने नहीं बचाया। मरुभूति की करुणा से नाग युगल को अगले जन्मों में मुक्ति के अवसर मिले।
मरुभूति के पुण्य और करुणा के कारण ही वे अगले जन्म में पार्श्वनाथ के रूप में जन्मे और तीर्थंकर बने। वहीं, कमठ ने अपने द्वेष और ईर्ष्या के कारण अगले जन्मों में बार-बार पार्श्वनाथ का विरोध किया।
इस प्रकार, पार्श्वनाथ भगवान के पिछले जन्म का मुख्य वर्णन "मरुभूति" के रूप में मिलता है, जो करुणाशील और धर्मात्मा थे।
यदि आप और भी पूर्वजन्मों का क्रमवार विवरण जानना चाहें, तो कृपया बताएं।