14 प्रकार के श्रोताओं के नाम
जैन धर्म के अनुसार, श्रोता (स्रोतागण) वे होते हैं जो उपदेश सुनते हैं। जैन आगमों में १४ प्रकार के श्रोताओं का उल्लेख मिलता है, जिन्हें "चतुर्दश श्रोतृवर्ग" कहा जाता है। वे इस प्रकार हैं:
- श्रुतज्ञानवान (श्रुतधारी मुनि)
- देशविरतिक मुनि
- प्रव्रज्या प्राप्त श्रावक
- अनगारधारी श्रावक
- गृहस्थ श्रावक
- तपस्वी श्रावक
- आर्यिका (आर्यिका साध्वी)
- क्षुल्लिका
- ऐलक
- क्षुल्लक
- ब्रह्मचारीणि
- ब्रह्मचारी
- श्राविका (गृहस्थ स्त्री)
- बालक-बालिका (बाल-श्रोता)
ये वे १४ प्रकार के श्रोता हैं, जो जिनवाणी या उपदेश को सुनने के अधिकारी माने गए हैं।