Arihant parmatma ke Atishaya kitne
जैन धर्म के अनुसार, अरिहंत परमात्मा (Arihant Parmatma) के ८ (आठ) मुख्य अतिशय (अद्भुत विशेषताएँ या दिव्यताएँ) माने गए हैं। इन्हें अरिहंत के आठ अतिशय (Ashta Atishaya) कहा जाता है। ये हैं:
- अणिमायत्व अतिशय – अरिहंत की काया अत्यन्त सुक्ष्म, लघु एवं अनगिनत गुणों से युक्त होती है।
- अचिन्त्य शक्ति अतिशय – अरिहंत के पास अद्भुत और असीम शक्ति होती है, जो समझ से परे है।
- अवधारण अतिशय – अरिहंत के उपदेश को अनेक जीव एक साथ, अपनी-अपनी भाषा में समझ सकते हैं।
- असंग अतिशय – अरिहंत सर्वथा राग-द्वेष आदि से रहित व निर्लिप्त रहते हैं।
- अवधारण अतिशय – उनके उपदेश में इतनी शक्ति होती है कि वहाँ उपस्थित सभी जीवों के संदेह दूर हो जाते हैं।
- संसारिक सुख अतिशय – उनके पास जाने मात्र से लोग अपूर्व सुख की अनुभूति करते हैं।
- अर्हत्व अतिशय – उन्हें सभी जीवों द्वारा वंदना, पूजा, व सम्मान प्राप्त होता है।
- मोक्षमार्ग-प्रदर्शन अतिशय – केवल अरिहंत ही सम्यक्दर्शन, सम्यक्ज्ञान, और सम्यक्चरित्र का मार्ग दिखाते हैं।
इन आठ अतिशयों के कारण ही अरिहंत परमात्मा की पूजा और वंदना की जाती है।