12 तपोंमें सर्वश्रेष्ठ तप कौन सा है
जैन धर्म में बारह प्रकार के तप (तपस्याएँ) बताए गए हैं, जिन्हें "द्वादश तप" कहा जाता है। इन बारह तपों को दो भागों में बाँटा गया है: बाह्य तप (छः) और आभ्यंतर तप (छः)।
इनमें सर्वश्रेष्ठ तप के रूप में "स्वाध्याय" तथा "ध्यान" को विशेष महत्त्व दिया गया है, परंतु शास्त्रों के अनुसार "ध्यान तप" (आभ्यंतर तपों में छठा) को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। ध्यान का अर्थ है—आत्मा में स्थित होना, आत्मा का चिंतन करना एवं आत्म-स्वरूप में लीन होना।
आचार्य जिनसेन ने आदिपुराण में कहा है: > "तपो ध्यानात्परं नास्ति।" > > अर्थात्—तपों में ध्यान से बढ़कर कोई तप नहीं है।
इस प्रकार, बारह तपों में 'ध्यान तप' को सर्वश्रेष्ठ तप कहा गया है।
संक्षेप में: बारह तपों में 'ध्यान तप' सर्वश्रेष्ठ है, क्योंकि उसके द्वारा आत्मा की शुद्धि और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।