Kumar pal raja harroj kitne Ghode Ko paani pilate the
कुमारपाल राजा की कथा जैन धर्म में प्रसिद्ध है। कुमारपाल राजा प्रतिदिन अपने अश्वों (घोड़ों) को पानी पिलाने की बात उनके जीवन प्रसंगों में आती है। जैन ग्रंथों के अनुसार, जब आचार्य हेमचंद्र जी ने कुमारपाल राजा को अहिंसा का उपदेश दिया, तब राजा ने अपने घोड़ों को पानी पिलाने के लिए आदेश दिया कि पहले वे तालाब या जलाशय के किनारे झाड़ू से भूमि को बुहारें, ताकि कोई भी जलचर जीव घोड़े के पांवों से न मरे।
घोड़ों की संख्या के विषय में विशेष रूप से 'हर रोज़ कितने घोड़ों को पानी पिलाते थे'—इसका स्पष्ट उल्लेख जैन साहित्य में नहीं मिलता। किंतु यह बताया गया है कि राजा के पास सैकड़ों घोड़े थे और वे सभी के प्रति अहिंसा का पालन करते हुए उन्हें पानी पिलवाते थे।
मुख्य संदेश यह है कि कुमारपाल राजा ने अहिंसा के पालन हेतु अपने दैनिक व्यवहार में भी जीवदया (सभी जीवों के प्रति करुणा) को महत्व दिया।