पालनपुर राजा प्रहलाद का दाह रोग कैसे ठीक हुआ
जैन धर्म के अनुसार, पालनपुर के राजा प्रह्लाद ( Prahlad ) का दाह रोग (जलन या अग्नि रोग) उनकी माता के पुण्य और जैन धर्म के प्रभाव से ठीक हुआ था। कथा के अनुसार, राजा प्रह्लाद को अत्यंत तीव्र दाह रोग हो गया था, जिसकी वजह से वे बहुत परेशान थे। कई वैद्यों और उपचारों के बाद भी उन्हें आराम नहीं मिला।
तब उनकी माता ने उन्हें जैन धर्म के तीर्थंकरों के प्रति श्रद्धा और सम्यक दर्शन (सही विश्वास) की बात कही। माता ने उन्हें जैन धर्म के नवकार मंत्र का जाप करने, अहिंसा और संयम का पालन करने तथा साधुओं के पास जाकर उपदेश ग्रहण करने की सलाह दी। राजा ने माता की बात मानी, जैन साधुओं से आशीर्वाद लिया, नवकार मंत्र का जाप किया और संयमित जीवन जीना प्रारंभ किया।
जैन धर्म की कृपा और पुण्य प्रभाव से राजा प्रह्लाद का दाह रोग धीरे-धीरे शांत हो गया। इस घटना से यह शिक्षा मिलती है कि श्रद्धा, पुण्य, और सम्यक मार्ग से असाध्य रोग भी शांत हो सकते हैं। साथ ही, जैन धर्म के अनुसार, जीवन में संयम, तप, और सच्चे धर्म का प्रभाव अद्भुत होता है।
संदर्भ: यह कथा जैन धर्म के विभिन्न चरित्र ग्रंथों व पुराणों में मिलती है, और इससे जैन धर्म में नवकार मंत्र व संयम के महत्व को दर्शाया गया है।