Sharavk Ko kitne vrat ucharane ke hai
जैन धर्म में श्रावक (गृहस्थ अनुयायी) के लिए मुख्य रूप से 12 व्रतों (बारह व्रत) का पालन करने का विधान है। ये व्रत इस प्रकार हैं:
5 अनुबंध (मुख्य) व्रत:
- अनुव्रत (अहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह)
- गुणव्रत (दिग्व्रत, भोगोपभोगपरिमाण, अनर्थदंडविरमन)
- शिखा व्रत (संलीनता, देशव्रत, उपवास)
- प्रतिमा व्रत (ध्यान, तप, स्वाध्याय)
- अतिथि-संविभाग व्रत (अतिथियों को भोजन देना आदि)
7 शील व्रत (अतिरिक्त व्रत):
- समाधि व्रत (संयम से जीवन यापन)
- उपवास व्रत (नियमित उपवास)
- पौषध व्रत (एक दिन के लिए साधु का जीवन जीना)
- अष्टमी व्रत (हर महीने की अष्टमी को उपवास)
- चतुर्दशी व्रत (हर महीने की चतुर्दशी को उपवास)
- रात्रि भोजन व्रत (रात्रि में भोजन न करना)
- समयिक व्रत (समय-समय पर ध्यान व संयम)
संक्षिप्त रूप में: श्रावक के लिए 12 व्रत मुख्य माने जाते हैं, जिन्हें पालन करने की अनुशंसा की जाती है। इनमें 5 अनुव्रत (छोटे व्रत), 3 गुण व्रत, और 4 शिक्षा व्रत शामिल हैं।
ये व्रत क्या हैं?
- अहिंसा अनुव्रत
- सत्य अनुव्रत
- अचौर्य अनुव्रत
- ब्रह्मचर्य अनुव्रत
- अपरिग्रह अनुव्रत
- दिग्व्रत
- देशावकाशिक व्रत
- अनर्थदंडविरमन व्रत
- सामायिक व्रत
- देशावकाशिक व्रत
- उपवास व्रत
- अतिथि संविभाग व्रत
निष्कर्ष: श्रावक को 12 व्रतों का उच्चारण/पालन करना चाहिए।