Abhi kitne Agam vidyaman hai
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जैन धर्म के श्वेताम्बर सम्प्रदाय में मूल आगम ग्रंथों की संख्या 45 मानी जाती है, जिन्हें दो भागों में बाँटा गया है: 11 अंग आगम (Ang Agam) और 34 अंग बह्य आगम (Ang Bahya Agam)।
दिगम्बर सम्प्रदाय के अनुसार, मूल आगम (12 अंग) समय के साथ लुप्त हो गए हैं, और वर्तमान में उपलब्ध आगम शुद्ध रूप में नहीं माने जाते। दिगम्बर परंपरा में शास्त्रों के रूप में 'षट्खंडागम' और 'कसायपाहुड' को प्रमुख माना जाता है, जो बाद में रचित हैं।
संक्षेप में:
- श्वेताम्बर परंपरा में 45 आगम ग्रंथ विद्यमान माने जाते हैं।
- दिगम्बर परंपरा में मूल आगम आज उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन उनके अनुसार अन्य प्राचीन ग्रंथ उपलब्ध हैं।