Athai ka pachkan sunai
अठाई (अष्टाहिका) का पचकाण (प्रतिज्ञा) जैन धर्म में उपवास अथवा विशेष तपस्या के आरंभ में लिया जाता है। नीचे अठाई का पचकाण (संस्कृत/हिन्दी में) दिया जा रहा है—
अठाई (अष्टाहिका) का पचकाण:
संस्कृत/हिन्दी में:
“इच्छामि अठाईयं तिविहं पच्चखाणं समणस्सणं पत्तियाणं, तिविहेण कायेण, वच्चेण, मणेण, जो मं तिविहेण कायेण, वच्चेण, मणेण, समणस्सणं पत्तियाणं, सव्वेहिं जणेहिं, पंचेहिं इंदियेहिं, पंचेहिं पावकम्मेहिं, सव्वेण जणेण, सव्वेहिं प्राणेहिं, सव्वेहिं भवसत्तिहिं, सव्वेहिं तिरियंचेहिं, सव्वेहिं जीवसत्तेहिं, सव्वेहिं रयणत्तएहिं, सव्वेहिं काएहिं, सव्वेहिं भावेहिं, सव्वेहिं चित्तेहिं, सव्वेहिं दुक्खेहिं, सव्वेहिं सुखेहिं, सव्वेहिं भोगेहिं, सव्वेहिं उपभोगेहिं, सव्वेहिं परिसहेहिं, सव्वेहिं कोडिलेहिं, सव्वेहिं अणुव्रत्तेहिं, सव्वेहिं महाव्रत्तेहिं, सव्वेहिं संजमधरेहिं, सव्वेहिं तवेहिं, सव्वेहिं सत्तेहिं, सव्वेहिं जीवसत्तेहिं, सव्वेहिं रयणत्तएहिं, सव्वेहिं काएहिं, सव्वेहिं भावेहिं, सव्वेहिं चित्तेहिं, सव्वेहिं दुक्खेहिं, सव्वेहिं सुखेहिं, सव्वेहिं भोगेहिं, सव्वेहिं उपभोगेहिं, सव्वेहिं परिसहेहिं, सव्वेहिं कोडिलेहिं, सव्वेहिं अणुव्रत्तेहिं, सव्वेहिं महाव्रत्तेहिं, सव्वेहिं संजमधरेहिं, सव्वेहिं तवेहिं, सव्वेहिं सत्तेहिं, सव्वेहिं जीवसत्तेहिं—अठाईयं तिविहं पच्चखाणं समणस्सणं पत्तियाणं, तिविहेण कायेण, वच्चेण, मणेण पच्चखाणं, समणस्सणं पत्तियाणं।”
सरल हिन्दी में अर्थ: मैं आज अष्टाहिका (अठाई) तप का पचकाण (प्रतिज्ञा) करता हूँ कि आठ दिन तक उपवास/तप के नियमों का पालन करूंगा। इस अवधि में न तो दिन में, न रात में, न संध्या में, न जल, न फल, न दूध, न भोजन, न कोई भी अन्य पदार्थ ग्रहण करूंगा। मैं इन आठ दिनों तक संयम, तपस्या, नियम, ध्यान, आराधना, प्रायश्चित, तथा गुरु-आज्ञा का पालन करूंगा।
नोट: विभिन्न संघों में पचकाण का पाठ अलग-अलग शैली में हो सकता है। उपर्युक्त पाठ सामान्य रूप में है। यदि आपको विशेष समुदाय या परंपरा का पाठ चाहिए, कृपया स्पष्ट करें।
आशा है, यह जानकारी लाभकारी होगी।