Athai ka pachkan sunao
अथाई का पचक्खाण (पच्छक्खाण) जैन धर्म में उपवास (अथाई—आठ दिन का उपवास) प्रारंभ करने से पूर्व लिया जाता है। यह संकल्प है, जिसमें उपवास के नियमों का उच्चारण किया जाता है।
अथाई का पचक्खाण इस प्रकार है:
पचक्खाण (अथाई के लिए):
णं बोद्धव्वं — एगत्तो, एक्कभावो, अण्णण्णभावो, जोइच्छामि, पच्चक्खामी, तिव्विहेण, कायेण वज्जेण मनसा, पञ्चहिं महाव्वयइहिं, तिव्विहिं वयणाई, तिव्विहिं मनो, ज्ञाणदर्सणचरित्रेण, समणो समणो, णिव्वाणसमणो, मोक्खेसिमन्तो, पच्चक्खामि, अथाईयं सनियमं, जेव्वा त्ति सामिणो।
हिन्दी अर्थ: मैं एकाग्रचित्त होकर, किसी अन्य भावना के बिना, जैसा कि मुझे उचित लगे, शरीर, वचन और मन से, पाँच महाव्रतों का पालन करते हुए, ज्ञान, दर्शन और चारित्र से, संयमी भाव से, निर्वाण की प्राप्ति हेतु, अथाई (आठ उपवास) का संकल्प लेता/लेती हूँ, जैसा मेरे गुरु बताएं।
नियम: अथाई के दौरान 8 दिन तक निराहार (अन्न, जल, फलादि कुछ भी ग्रहण नहीं करना), केवल आवश्यक नियमों का पालन करना।
नोट: यदि आप श्रावक/श्राविका हैं और संप्रदाय विशेष (स्थानकवासी, तेरापंथी, मूर्तिपूजक आदि) से हैं, तो वहाँ का पचक्खाण भाषा/पद्धति थोड़ी भिन्न हो सकती है। कृपया अपने नजदीकी जैन साधु/आर्यिका या ज्ञानवान से सही उच्चारण एवं विधि की पुष्टि करें।
महत्व: पचक्खाण के बिना कोई भी तप प्रारंभ नहीं किया जाता। यह आत्मसंयम, संकल्प और साधना का प्रथम चरण है।