Athai ka pachkan sunai श्वेतांबर
अथाई का पचकण (अथाई का पच्चखान) श्वेतांबर परंपरा में उपवास (अथाई – आठ दिन का उपवास) प्रारम्भ करने से पूर्व लिया जाता है। इसका उद्देश्य उपवास के नियमों का संकल्प करना होता है। यहाँ श्वेतांबर परंपरा में प्रचलित अथाई का पचकण प्रस्तुत है:
अथाई का पचकण (श्वेतांबर):
णिस्सीहि, णिस्सीहि, णिस्सीहि। एगं अथाईयं पच्चखामी, जीवितेण वाएण, तिरिकालेण, सव्वेहिं पावकम्मेहिं विरमणं पच्चखामी। इमं में पच्चखाणं, जिनकज्जे, भत्ते, पाणे, चेयवत्ते, पाधोप्पद्धाए, पुक्खरमणाए, एगंतणुवत्ते, सुद्धपायाए, थिरमणवत्ते, सुद्धशयाए, सुद्धसिलाए, सुद्धोस्साए, सुद्धाणाए, सुद्धकम्माए, सुद्धपच्चखाणाए, सुद्धवेसाए, सुद्धभत्ताए, सुद्धलयाए, सुद्धपरिवत्ताए, सुद्धपायाए, सुद्धधम्माए, सुद्धगुरुए, सुद्धसाधूए, सुद्धपसाए, सुद्धदेवाए, सुद्धआगााए, सुद्धसुताए, सुद्धपणाए, सुद्धपुन्नाए, सुद्धसामाए, सुद्धसत्थाए, सुद्धकम्माए, सुद्धपयाए, सुद्धपच्चखाणाए, सुद्धजिणाए, सुद्धपणाए, सुद्धपयाए, सुद्धसुताए, सुद्धधम्माए, सुद्धगुरुए, सुद्धसाधूए, सुद्धपसाए, सुद्धदेवाए, सुद्धभत्ताए, सुद्धलयाए, सुद्धवेसाए, सुद्धकम्माए, सुद्धपयाए, सुद्धपच्चखाणाए, सुद्धजिणाए, सुद्धधम्माए, सुद्धगुरुए, सुद्धसाधूए, सुद्धपसाए, सुद्धदेवाए, सुद्धआगााए, सुद्धसुताए, सुद्धपणाए, सुद्धपुन्नाए, सुद्धसामाए, सुद्धसत्थाए, सुद्धकम्माए, सुद्धपयाए, सुद्धपच्चखाणाए, सुद्धजिणाए, सुद्धधम्माए, सुद्धगुरुए, सुद्धसाधूए, सुद्धपसाए, सुद्धदेवाए, सुद्धभत्ताए, सुद्धलयाए, सुद्धवेसाए, सुद्धकम्माए, सुद्धपयाए, सुद्धपच्चखाणाए, सुद्धजिणाए, सुद्धपणाए, सुद्धपयाए, सुद्धसुताए, सुद्धधम्माए, सुद्धगुरुए, सुद्धसाधूए, सुद्धपसाए, सुद्धदेवाए। (यह एक विस्तृत संकल्प है, जिसमें साधारणतया उपवास के नियम, संयम व शुद्धता का संकल्प लिया जाता है।)
सरल अथवा संक्षिप्त पचकण:
णिस्सीहि, णिस्सीहि, णिस्सीहि। एगं अथाईयं पच्चखामी, जीवितेण वाएण, तिरिकालेण, सव्वेहिं पावकम्मेहिं विरमणं पच्चखामी।
अर्थ: मैं (तीन बार) नमस्कार करता हूँ। मैं आठ दिन का उपवास करता हूँ, जीवन पर्यन्त, तीनों काल में, सभी पाप कर्मों से विरत रहने का संकल्प करता हूँ।
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