Sham ke pani ka pachkan
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शाम के पानी का पचकन (Pachkan) जैन धर्म में विशेष रूप से उपवास, आयंबिल, या अन्य व्रत करते समय लिया जाता है। इसका उद्देश्य सूर्यास्त के बाद गलती से जल पीने या भोजन करने से बचना और मन में संयम बनाए रखना है।
शाम के पानी का पचकन इस प्रकार लिया जाता है:
संस्कार:
- सूर्यास्त के बाद पानी या भोजन ग्रहण नहीं करने का दृढ़ संकल्प।
- पंच परमेष्ठी (अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधु) की वंदना।
- मन, वचन, काय से दोष न करने का संकल्प।
शब्द: "मैं आज की रात्रि के लिए, जब तक कल का सूर्योदय न हो, तब तक जल या जलयुक्त पदार्थ ग्रहण नहीं करूंगा/करूंगी। पंच परमेष्ठी मुझे इस व्रत को पालन करने की शक्ति दें।"
अर्थ: इसका अर्थ है कि सूर्यास्त के बाद आप जल ग्रहण नहीं करेंगे और इस नियम का पालन पूरी श्रद्धा और सावधानी से करेंगे।
महत्व:
- संयम और आत्म-नियंत्रण की साधना।
- स्वास्थ्य और आध्यात्मिक शुद्धता की रक्षा।
- अहिंसा की भावना का पालन।
अगर आप किसी विशेष पचकन या विधि के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं या संस्कृत/प्राकृत में पचकन चाहिए, तो कृपया बताएं।