Tivihar ka pachkhkhan evening ko le ya morning mai
Tivihar ka pachkhkhan (तीविहार का पच्चखाण) प्रायः संध्याकाल (evening) में लिया जाता है। इसका अर्थ है—सूर्यास्त के बाद तीन प्रकार के विहार (भोजन, जल और रसायन) का त्याग करना। जैन परंपरा के अनुसार, जब सूर्यास्त हो जाता है, उसके बाद किसी भी प्रकार का आहार, जल या रसायन ग्रहण नहीं किया जाता। Tivihar ka pachkhkhan लेने का उपयुक्त समय सूर्यास्त के तुरंत बाद है, जिससे रातभर उपवास (उपरोक्त चीजों का त्याग) किया जाता है।
हालाँकि, यदि कोई विशेष कारण हो तो सुबह भी इसका संकल्प लिया जा सकता है, विशेषकर जब किसी को पूरा दिन उपवास रखना हो। परंतु पारंपरिक रूप से यह संकल्प संध्याकाल में ही लिया जाता है।
संक्षेप में:
- Tivihar pachkhkhan मुख्यतः संध्या (evening) में लिया जाता है।
- इसका उद्देश्य सूर्यास्त के बाद आहार, जल, रसायन से विरति है।
- विशेष परिस्थिति में सुबह भी लिया जा सकता है, पर परंपरा में शाम का समय मान्य है।