Tivihar ka pachkhkhan evening ko le ya morning mai bina tapasya walk
जैन धर्म में "पच्चखण" (प्रतिज्ञा या व्रत) लेना दैनिक साधना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। Tivihar (तीविहार) पच्चखण का अर्थ है—रात्रि भोजन त्याग (सूर्यास्त के बाद भोजन न करना), जो जैन अनुशासन में अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
पच्चखण कब लें?
- आदर्श रूप से, Tivihar पच्चखण सुबह के समय लिया जाता है, जब दिन की साधना शुरू होती है।
- यदि आप तपस्या (उपवास, एकासन, आदि) नहीं कर रहे हैं, तो भी पच्चखण लेना आवश्यक है, ताकि दिनभर के लिए आपकी मनोवृत्ति और संयम सुनिश्चित रहे।
- पच्चखण आप सुबह स्नान आदि के बाद, शांत मन से ले सकते हैं।
- यदि कभी सुबह पच्चखण लेना छूट जाए, तो आप दिन में (जैसे दोपहर को) भी ले सकते हैं, लेकिन भोजन से पूर्व लिया जाना चाहिए।
- शाम को पच्चखण लेना अनुशंसित नहीं है, क्योंकि Tivihar का मुख्य उद्देश्य सूर्यास्त के बाद भोजन न करना है। इसलिए, पच्चखण सूर्यास्त से पहले ही ले लेना चाहिए।
पैदल चलने (walk) का पच्चखण से संबंध:
- पच्चखण लेना और वॉक करना—ये दोनों स्वतंत्र कार्य हैं। पच्चखण लेना तपस्या (उपवास) के साथ अनिवार्य नहीं है; आप सामान्य दिनचर्या में भी ले सकते हैं।
सारांश: Tivihar पच्चखण सुबह या दिन में भोजन से पूर्व ले सकते हैं। यह तपस्या (उपवास) के साथ अनिवार्य नहीं, बल्कि प्रत्येक जैन अनुयायी के लिए श्रेष्ठ है। रात्रि भोजन त्याग जैन संस्कृति का मुख्य हिस्सा है, इसलिए पच्चखण सूर्यास्त से पूर्व ही लें।
संदर्भ:
- जैन आगम: व्रत, नियम एवं पच्चखण विधि
- आचार्य तुलसी, पंडित दूल्हाराज जी गंडोलिया द्वारा लिखित जैन विधि पुस्तिकाएँ