नित्य निगोदिया जीव को ज से क्या कहते है
जैन धर्म के अनुसार, "नित्य निगोदिया जीव" वे जीव होते हैं जो सदैव निगोद (न्यूनतम विकास अवस्था) में ही रहते हैं और कभी भी उससे ऊपर (उत्तम गतियों) में नहीं जाते। इन्हें "ज" से "जघन्य" भी कहा जाता है। जघन्य का अर्थ है– अत्यंत निम्न अवस्था वाले। अतः नित्य निगोदिया जीवों को जैन दर्शन में "जघन्य जीव" कहा जाता है।