अच्छी गति से बुरी गति मै जनम लेना , जैन धर्म के अनुसार दु से उत्तर
जैन धर्म के अनुसार, अच्छी गति (उत्तम गति) से बुरी गति (नरक, तिर्यंच या नारकीय गति) में जन्म लेने का मुख्य कारण पाप कर्मों का बंध और पुण्य का क्षय है। जब जीव पुण्य कर्मों का फल भोग चुका होता है और उसके द्वारा किए गए पाप कर्म प्रमुख हो जाते हैं, तो वह अच्छी गति से बुरी गति में जा सकता है।
दूसरे शब्दों में, यदि किसी ने मन, वचन और काया से हिंसा, असत्य, चोरी, कुशील, परिग्रह आदि पाप कर्म किए हैं, तो मृत्यु के पश्चात वह बुरी गति (नरक, तिर्यंच, या नारकीय) में जन्म ले सकता है, भले ही उसका वर्तमान जन्म उत्तम गति (मनुष्य या देव) में हो। यह कर्म सिद्धांत के अनुसार होता है।
इसका मुख्य कारण—
- पाप कर्मों का उदय (अधर्मयुक्त कृत्य)
- पुण्य का क्षीण होना
- राग-द्वेष, मोह, और गलत प्रवृत्तियाँ
इस प्रकार, जैन धर्म में जन्मों का परिवर्तन कर्मों के अनुसार होता है, और अच्छी गति से बुरी गति में जाना पाप कर्मों के कारण संभव है।