किसकी कुस्ती में भगवान पगारे तब इन्द्र का सिंहासन कंपायमान नही हुआ
भगवान बाहुबली की कुश्ती में—जब उन्होंने अपने भ्राता भरत के विरुद्ध पाँव उठाया—तब इन्द्र का सिंहासन कंपायमान नहीं हुआ। कारण: देव–इन्द्र का सिंहासन केवल आध्यात्मिक महत्त्व की घटनाओं (जैसे तीर्थंकरों के कल्याणक) पर हिलता है, युद्ध/हिंसा के क्षण पर नहीं। इसी क्षण बाहुबली को वैराग्य हुआ और उन्होंने संन्यास ग्रहण किया।