पूर्व काल में जैन धर्म का कितना विस्तार था
जैन धर्म का प्राचीन समय में भारत में बहुत व्यापक विस्तार था। ऐतिहासिक और पुरातात्विक साक्ष्य के अनुसार, जैन धर्म प्राचीन भारत के कई क्षेत्रों में प्रचलित था। महावीर स्वामी के समय (6वीं शताब्दी ई.पू.) और उसके बाद, मगध, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश आदि राज्यों में जैन धर्म के अनुयायियों की बड़ी संख्या थी।
जैन धर्म के तीर्थंकरों ने भारत के विभिन्न भागों में उपदेश दिए। मौर्य सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य एवं सम्राट खारवेल जैसे शासकों ने जैन धर्म को संरक्षण और प्रोत्साहन दिया। अजंता-एलोरा, श्रवणबेलगोला, पावापुरी, शत्रुंजय, सम्मेद शिखर आदि स्थानों पर जैन मंदिर, गुफाएँ और तीर्थस्थल इसकी व्यापकता के प्रमाण हैं।
मध्यकाल में भी जैन धर्म का प्रभाव दक्षिण भारत, विशेषकर कर्नाटक और तमिलनाडु में रहा है। वर्तमान में भी जैन धर्म के अनुयायी भारत के अनेक राज्यों में निवास करते हैं, परंतु प्राचीन काल की तुलना में संख्या कम हो गई है।
संक्षेप में, पूर्व काल में जैन धर्म का विस्तार सम्पूर्ण भारत में था और यह एक प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा के रूप में स्थापित था।