Machli chirte hue kise kawalgyan hua
“मछली चीरते (साफ़ करते) हुए” केवलज्ञान पाने वाले के रूप में परम्परागत जैन कथाओं में वंखाल केवली (जिसे वंखाल/बंखाल भी कहा जाता है) का नाम मिलता है। यह प्रसंग मुख्यतः श्वेतांबर परम्परा की लोककथाओं में प्रसिद्ध है; दिगंबर ग्रन्थों में इसका विशेष उल्लेख नहीं मिलता।