Posted by Jain Follower त्वचा चीरते हुए, दर्द सहते हुए किसे केवलज्ञान हुआ? 12 months ago 28 भगवान बहुबली (गोम्मटेश्वर)। वे लंबे समय तक कायोत्सर्ग में अचल खड़े रहे; बेलें लिपटकर देह/त्वचा चीरती रहीं, चींटियों के बिल बने—उस दु:ख-सहन में अहं का क्षय होते ही उन्हें केवलज्ञान हुआ।