Kis shravika ne agami gotra bandha?
“Agami gotra bandha” वाक्यांश Jain सिद्धांत की प्रचलित भाषा नहीं है। कर्म सिद्धांत में “गोत्र” एक अलग कर्म है (उच्च-गोत्र और निच-गोत्र), जबकि “आगामी (आगामि)” का अर्थ है भविष्य में बनने वाला कर्म। इसलिए “आगामी गोत्र बंध” जैसा मिलाजुला प्रयोग शास्त्रीय रूप से स्पष्ट नहीं माना जाता।
यदि आपका आशय किसी विशिष्ट कथा/प्रश्नोत्तरी में पूछे गए प्रसंग से है, तो कृपया उसके संदर्भ (ग्रंथ/कहानी का नाम) बताने पर ही सही नाम दिया जा सकता है। Jain कर्म-सिद्धांत और गोत्र-कर्म का संक्षिप्त, शुद्ध विवरण यहाँ देख सकते हैं: