Visthanakji yantra kya hai
47
लगे हाथ बताऊँ—“Visthanakji yantra” नाम से कोई प्रचलित/मान्य जैन यंत्र नहीं मिलता. अक्सर बोलचाल में लोग अलग‑अलग उच्चारण कर देते हैं, और उनका संकेत आमतौर पर “सिद्धचक्र (नवपदजी) यंत्र” की ओर होता है।
जैन धर्म में “यंत्र” का अर्थ
- यंत्र एक पवित्र रेखांकन/आकृति है, जिसे पूजा‑ध्यान में एकाग्रता और सद्गुणों के स्मरण के लिए रखा जाता है।
- इसका उद्देश्य केवल आध्यात्मिक उन्नति है—कर्म-क्षय, शांति, विनय और नवकार भावना को बढ़ाना।
सिद्धचक्र (नवपदजी) यंत्र क्या है
- श्वेतांबर परम्परा में इसे सिद्धचक्र/नवपदजी कहा जाता है; दिगंबर परम्परा में “नवदेवता/नवपदजी” कहा जाता है।
- इसका मर्म: पंच परमेष्ठी (अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधु) और सम्यक् दर्शन‑ज्ञान‑चारित्र जैसे नव पदों की भावना का निरन्तर स्मरण।
- प्रयोग: आयंबिल ओली, प्रतिदिन की पूजा‑ध्यान, और सद्गुणों पर मन को स्थिर करने हेतु।
जैन परम्परा में अन्य प्रचलित यंत्र भी मिलते हैं, जैसे ऋषि‑मंडल यंत्र, सर्वतोभद्र यंत्र, नवानु (99) यंत्र आदि—इनका भी प्रयोजन मन को धर्म‑ध्यान में लगाना ही है, न कि सांसारिक चमत्कार।
यदि आपका आशय “सिद्धचक्र (नवपदजी) यंत्र” से है, तो संक्षिप्त, सरल जानकारी यहाँ देख सकते हैं: