Naukashi Karne Se Kitna narkaysya kam Hota Hai
लगता है आपने “नवकारसी/नवकाशी” (Navkarsi) के बारे में पूछा है — यानी सूर्योदय के कम-से-कम 48 मिनट बाद पहला आहार लेना।
नरकायुṣ्य (नरक गति का आयुष्य कर्म) “कितना” कम होता है — इसका कोई संख्यात्मक माप जैन आगम/परंपरा में नहीं दिया गया। परंपरागत अर्थ यह है:
- नवकारसी से रात्रिकालीन सूक्ष्म-जीव हिंसा से बचाव होता है, इसलिए पापबंधन घटता है (सम्वर), और पूर्व-बँधे अशुभ कर्म की निर्जरा में सहायक होता है।
- जब हिंसा, असंयम और असावधानी कम होती है, तो नरक-आयुष्य का बंधन रुकता/हल्का होता है। पर “फल” संख्या या प्रतिशत में नहीं बताया गया—यह जीव की भाव-शुद्धि, सावधानी, और नियमपालन पर निर्भर है।
परंपरागत भेद:
- श्वेतांबर परंपरा: सामान्यतः सूर्योदय के 48 मिनट बाद नवकारसी।
- दिगंबर परंपरा: समय-गणना/स्थानीय रीति में थोड़ा अंतर हो सकता है, पर भाव वही—दिन में, प्रकाश में, सावधानीपूर्वक आहार।
सार: नवकारसी करने से नरकायुṣ्य “गणना-योग्य मात्रा” में नहीं, बल्कि कारण-रूप से कम होने की दिशा बनती है—अहिंसा, संयम और सावधानी बढ़ने से पापबंधन घटता है और अशुभ आयुष्य-बन्ध का कारण कमजोर पड़ता है।
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