Shalaka Purush kaunhote he
Shalaka Purush (शलाकापुरुष) Jain Dharma में वे 63 महान पुरुष हैं जो हर आधा-कालचक्र (अवसर्पिणी और उत्सर्पिणी) में प्रकट होते हैं। ये धर्म और लोक-व्यवस्था को दिशा देने वाले असाधारण महापुरुष माने जाते हैं। इनके जीवन-चरित्र को “त्रिषष्ठि-शलाकापुरुष-चरित” जैसे ग्रंथों में विस्तार से बताया गया है।
उनकी पाँच श्रेणियाँ और संख्या:
- 24 तीर्थंकर: धर्म को पुनः स्थापन करने वाले परमतत्त्वज्ञानी। उदाहरण: ऋषभदेव, महावीर।
- 12 चक्रवर्ती: छह खंडों पर राज्य करने वाले आदर्श सम्राट। उदाहरण: भरत चक्रवर्ती।
- 9 बलदेव (बलभद्र): अहिंसा और मर्यादा से धर्म-स्थापन करने वाले महावीर पुरुष। उदाहरण: बलराम।
- 9 वासुदेव (नारायण): अधर्म का उन्मूलन बल और वीर्य से करने वाले। उदाहरण: श्रीकृष्ण (जैन परंपरा में नवें नारायण)।
- 9 प्रति-वासुदेव (प्रति-नारायण): वासुदेव के प्रतिद्वन्द्वी, अंततः धर्मबल से पराजित।
मुख्य बातें:
- ये 63 शलाकापुरुष हर आधे समय-चक्र में होते हैं; इसलिए वर्तमान अवसर्पिणी में भी इनकी पूर्ण सूची मिलती है।
- इनका उद्देश्य आत्म-उन्नति, अहिंसा, संयम, त्याग और आदर्श राज्य-व्यवस्था के आदर्श स्थापित करना है।
- इनकी कथाएँ जैन आगम-परंपरा के अनुरूप मोक्षमार्ग के सिद्धांतों—सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान, सम्यक् चरित्र—को समझाती हैं।
परंपरा-भेद:
- दिगंबर और श्वेतांबर—दोनों परंपराएँ 63 शलाकापुरुषों की यही पाँच श्रेणियाँ और संख्या मानती हैं। कुछ नामों/वृत्तांतों के विवरण में लघु-अंतर मिल सकते हैं, पर सिद्धांत एक ही है।
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