Saat lakh stotra
“Saat Laakh Stotra” usually refers to the Saat Laakh Sutra — a short kṣamā-pātra (seeking forgiveness) that enumerates the 8.4 million life-forms (jīva–yoni) and ends with repentance for any injury to them. It is recited in pratikraman and other daily sādhanā.
Original text (traditional Hindi/Prakrit form)
- सात लाख पृथ्वीकाय,
- सात लाख अप्काय,
- सात लाख तेउकाय,
- सात लाख वाउकाय,
- दस लाख प्रत्येक वनस्पति-काय,
- चौदह लाख सामान्य (साधारण) वनस्पति-काय,
- दो लाख द्वीन्द्रिय,
- दो लाख त्रीन्द्रिय,
- दो लाख चउरिन्द्रिय,
- चार लाख देवता,
- चार लाख नारकी,
- चार लाख तिर्यंच पंचेन्द्रिय,
- चौदह लाख मनुष्य।
- इस तरह चौरासी लाख जीव-योनि में से मेरे जीव ने जो कोई जीव-हिंसा की हो, करायी हो, या करते हुए का अनुमोदन किया हो—उन सब का मन, वचन, काया से “मिच्छा मि दुक्कडं” (मिच्छामी दुक्कड़ं)।
सरल अर्थ (arth)
- ब्रह्माण्ड में 84 लाख प्रकार के जीव बताए गए हैं: 1-इन्द्रिय पर्यायों में पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और वनस्पति; फिर 2, 3, 4 इन्द्रिय; 5-इन्द्रिय तिर्यंच; देव, नारकी, और मनुष्य।
- इस श्लोक में साधक स्वीकार करता है: इन सभी जीव-पर्यायों में मैंने—सीधे, परोक्ष रूप से करवाकर, या अनुमोदना करके—जो भी हिंसा की हो, उस सब के लिए मैं मन-वचन-काया से क्षमा माँगता हूँ (मिच्छामी दुक्कडं)।
- भाव: समस्त जीवों के प्रति अहिंसा, मैत्री और क्षमाभाव का दृढ़ संकल्प।
पारंपरिक प्रयोग
- प्रातः–सायं स्मरण, समायिक/प्रतिक्रमण के अंत में, या किसी भी समय क्षमाभाव उत्पन्न करने हेतु।
- जप के साथ दया, सावधानी और अहिंसा-व्रत को सुदृढ़ करने का साधन माना गया है।
परम्परा-नोट
- दिगंबर और श्वेतांबर—दोनों परम्पराओं में तत्त्व समान है; शब्दों में हल्की भिन्नताएँ मिल सकती हैं, पर भाव और प्रयोजन (सर्व जीवों से क्षमा) एक ही रहता है।
महत्त्वपूर्ण स्पष्टता
- कुछ लोग “सात लाख स्तोत्र” शब्द का उपयोग उवसग्गहरं (Uvasaggaharam) स्तोत्र के संदर्भ में भी बोलचाल में कर देते हैं, क्योंकि उसके जप-अनुष्ठान में “7 लाख” संख्या की परम्परा कही जाती है। दोनों रचनाएँ अलग हैं: Saat Laakh Sutra क्षमापना-प्रधान है; उवसग्गहरं स्तोत्र भगवान पार्श्वनाथ की स्तुति है और विघ्न–निवारण का जप माना जाता है।
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